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गुरुवार, 8 जनवरी 2026

Green Chickpeas (Hara Chana) Benefits: जो लोग हरा चना खाते हैं, उन्हें ये 3 बीमारी छू भी नहीं पाती

Green Chickpeas (Hara Chana) Benefits: जो लोग हरा चना खाते हैं, उन्हें ये 3 बीमारी छू भी नहीं पाती

Green Chickpeas (Hara Chana) benefits for elderly – कमजोरी, पेट और खून की कमी में फायदेमंद

उम्र बढ़ने के साथ शरीर वैसा साथ नहीं देता जैसा जवानी में देता था। सुबह उठते ही थकान, हल्की-सी कमजोरी, पेट का ठीक से साफ़ न होना, या फिर बार‑बार बीमार पड़ जाना—ये सब बातें बहुत से बुज़ुर्गों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन जाती हैं। ऐसे में लोग अक्सर महंगी दवाओं और टॉनिक की तरफ़ भागते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि कई बार समाधान हमारी थाली में ही छुपा होता है।

हरा चना उन्हीं सादे लेकिन असरदार खाद्य पदार्थों में से एक है, जिसे बड़े‑बुज़ुर्ग सालों से खाते आए हैं। आज जब लोग इसे भूलते जा रहे हैं, तब शरीर की तकलीफ़ें बढ़ती जा रही हैं। यह लेख किसी चमत्कार का दावा नहीं करता, बल्कि अनुभव, समझ और पोषण के आधार पर बताता है कि हरा चना क्यों बुज़ुर्गों के लिए इतना ज़रूरी माना जाता है।

हरा चना क्या है और इसे साधारण क्यों नहीं समझना चाहिए

हरा चना दरअसल वही चना है, जिसे पूरी तरह सूखने से पहले इस्तेमाल किया जाता है। इसमें नमी होती है, स्वाद हल्का मीठा होता है और पचने में यह सूखे चने की तुलना में आसान माना जाता है। यही वजह है कि पुराने समय में इसे उबालकर, भूनकर या सब्ज़ी के रूप में खूब खाया जाता था।

अक्सर लोग सोचते हैं कि हरा चना तो बस पेट भरने की चीज़ है, लेकिन इसमें मौजूद प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम और कई ज़रूरी मिनरल इसे बुज़ुर्गों के लिए बेहद उपयोगी बनाते हैं। यह शरीर को धीरे‑धीरे मज़बूत करता है, बिना ज़्यादा बोझ डाले।

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बीमारी नंबर 1: कमज़ोरी और लगातार थकान

बहुत से बुज़ुर्ग कहते हैं कि काम ज़्यादा नहीं करते, फिर भी शरीर थका‑थका सा क्यों रहता है। इसका एक बड़ा कारण पोषण की कमी और मांसपेशियों का धीरे‑धीरे कमज़ोर होना है। उम्र के साथ शरीर को प्रोटीन की ज़रूरत बढ़ जाती है, लेकिन पाचन क्षमता पहले जैसी नहीं रहती।

हरा चना इस मामले में संतुलन बनाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक प्रोटीन शरीर को ताकत देता है और मांसपेशियों को सहारा देता है। साथ ही, इसका फाइबर धीरे‑धीरे ऊर्जा देता है, जिससे अचानक थकान महसूस नहीं होती। जो बुज़ुर्ग नियमित रूप से हरा चना खाते हैं, वे अक्सर बताते हैं कि दिनभर शरीर में हल्की‑सी फुर्ती बनी रहती है।

यह कोई जादू नहीं है, बल्कि लगातार मिलने वाला सही पोषण है, जो शरीर को अंदर से संभालता है।


बीमारी नंबर 2: पेट की गड़बड़ी और कब्ज़

पेट की समस्या बुज़ुर्गों की सबसे आम परेशानी मानी जाती है। कभी कब्ज़, कभी गैस, तो कभी पेट भारी‑सा लगना—इन सबका सीधा असर पूरे शरीर पर पड़ता है। जब पेट साफ़ नहीं रहता, तो दवाइयाँ भी ठीक से असर नहीं करतीं।

हरा चना फाइबर का अच्छा स्रोत है। यह आंतों को सक्रिय रखने में मदद करता है और मल को नरम बनाकर बाहर निकालने में सहायक होता है। जो लोग इसे सही मात्रा में और सही तरीके से खाते हैं, उनमें पेट से जुड़ी शिकायतें धीरे‑धीरे कम होती देखी जाती हैं।

पुराने समय में बुज़ुर्ग पेट को शरीर की जड़ मानते थे। उनका मानना था कि अगर पेट ठीक है, तो आधी बीमारियाँ अपने‑आप दूर रहती हैं। हरा चना इसी सोच का एक हिस्सा रहा है।


बीमारी नंबर 3: खून की कमी और चक्कर आना

उम्र बढ़ने के साथ खून की कमी यानी एनीमिया की समस्या भी बढ़ती है। इसका असर सीधे दिमाग़ और दिल पर पड़ता है—हल्का‑सा उठने पर चक्कर आना, सांस फूलना या जल्दी थक जाना।

हरा चना आयरन और फोलेट जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है। ये खून बनने की प्रक्रिया में मदद करते हैं। खासकर उन बुज़ुर्गों के लिए, जो ज़्यादा मांसाहार नहीं करते, हरा चना एक अच्छा विकल्प माना जाता है।

नियमित सेवन से शरीर को धीरे‑धीरे ज़रूरी तत्व मिलते रहते हैं, जिससे खून की कमी का खतरा कम हो सकता है।


हरा चना कैसे खाएं ताकि सच में फायदा मिले

हरा चना खाना तभी फायदेमंद होता है, जब उसे सही तरीके से खाया जाए। बहुत ज़्यादा या गलत समय पर खाने से लाभ की जगह परेशानी भी हो सकती है।

अक्सर बुज़ुर्गों के लिए उबला हुआ या हल्का भुना हुआ हरा चना बेहतर माना जाता है। इसे बहुत मसालेदार बनाकर खाने से बचना चाहिए। सुबह या दोपहर के समय इसका सेवन पाचन के लिए आसान रहता है।


कितनी मात्रा सही मानी जाती है

यह ज़रूरी नहीं कि ज़्यादा खाने से ज़्यादा फायदा हो। बुज़ुर्गों के लिए एक छोटी कटोरी हरा चना पर्याप्त मानी जाती है। शरीर की प्रकृति और पाचन क्षमता के अनुसार मात्रा में थोड़ा‑बहुत फर्क हो सकता है।

अगर पहले से कोई गंभीर बीमारी या दवा चल रही हो, तो किसी जानकार या चिकित्सक से सलाह लेना समझदारी होती है।

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बुज़ुर्गों के अनुभव क्या कहते हैं

कई बुज़ुर्ग बताते हैं कि जब उन्होंने हरा चना दोबारा अपनी दिनचर्या में शामिल किया, तो उन्हें धीरे‑धीरे फर्क महसूस हुआ। पेट हल्का रहने लगा, कमजोरी में कमी आई और छोटी‑छोटी बातों में थकान नहीं होने लगी।

ये अनुभव किसी एक व्यक्ति के नहीं, बल्कि सालों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा हैं।


सावधानी और ज़रूरी समझ

यह लेख जानकारी और अनुभव पर आधारित है। हरा चना कोई दवा नहीं है और न ही यह हर बीमारी का इलाज है। शरीर की स्थिति अलग‑अलग होती है, इसलिए किसी भी चीज़ को नियमित रूप से शुरू करने से पहले अपनी स्थिति को समझना ज़रूरी है।

निष्कर्ष: सादगी में छुपी सेहत

हरा चना कोई नई खोज नहीं है, बल्कि पुरानी समझ का हिस्सा है। जो लोग इसे अपनी रोज़मर्रा की आदत में शामिल करते हैं, वे अक्सर छोटी-छोटी परेशानियों से बचे रहते हैं। शायद इसी वजह से कहा जाता है कि जो लोग हरा चना खाते हैं, उन्हें ये 3 बीमारी छू भी नहीं पाती।

सेहत का रास्ता हमेशा महंगी चीज़ों से नहीं होकर जाता। कई बार साधारण और सस्ता विकल्प ही शरीर को सबसे ज़्यादा सहारा देता है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: क्या बुज़ुर्ग रोज़ हरा चना खा सकते हैं?

हाँ, ज़्यादातर बुज़ुर्ग सीमित मात्रा में रोज़ हरा चना खा सकते हैं। यह शरीर को धीरे-धीरे पोषण देता है। लेकिन अगर पाचन बहुत कमज़ोर है या कोई विशेष बीमारी है, तो मात्रा कम रखना बेहतर होता है।

प्रश्न 2: हरा चना सुबह खाना बेहतर है या रात को?

सुबह या दोपहर के समय हरा चना खाना पाचन के लिए आसान माना जाता है। रात में खाने से कुछ लोगों को गैस या भारीपन महसूस हो सकता है।

प्रश्न 3: क्या हरा चना डायबिटीज़ वाले बुज़ुर्ग खा सकते हैं?

अधिकतर मामलों में हरा चना सीमित मात्रा में डायबिटीज़ वालों के लिए सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसमें फाइबर होता है। फिर भी शुगर की स्थिति के अनुसार सलाह लेना समझदारी है।

प्रश्न 4: हरा चना कच्चा खाना सही है या उबालकर?

बुज़ुर्गों के लिए उबला हुआ या हल्का भुना हुआ हरा चना ज़्यादा सुरक्षित और पचने में आसान माना जाता है। कच्चा चना कुछ लोगों को भारी लग सकता है।

प्रश्न 5: क्या हरा चना गैस बढ़ाता है?

अगर मात्रा ज़्यादा हो जाए या जल्दी-जल्दी खाया जाए, तो गैस की शिकायत हो सकती है। सही मात्रा और धीरे-धीरे चबाकर खाने से यह समस्या कम रहती है।

प्रश्न 6: हरा चना और सूखा चना – बुज़ुर्गों के लिए कौन बेहतर है?

दोनों के अपने फायदे हैं, लेकिन हरा चना नमी वाला होने के कारण बुज़ुर्गों के लिए आमतौर पर ज़्यादा आसान माना जाता है।

प्रश्न 7: हरा चना कितनी मात्रा में खाना सही है?

आमतौर पर एक छोटी कटोरी पर्याप्त मानी जाती है। ज़्यादा खाने से फायदा बढ़ता नहीं, बल्कि पेट पर बोझ पड़ सकता है।

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