आंवले का मुरब्बा कैसे बनाएं? 90% लोग यहीं गलती कर देते हैं
आज के समय में भी जब कमजोरी, पाचन की समस्या, आंखों की रोशनी कम होना, बालों का झड़ना या जल्दी थकान महसूस होने लगे, तो आंवले का मुरब्बा एक भरोसेमंद देसी विकल्प माना जाता है। इस लेख में आंवले के मुरब्बे की पूरी प्रक्रिया, उसके फायदे, बनाने की विधि और सही तरीके से सेवन की जानकारी विस्तार से दी जा रही है।
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आंवले का मुरब्बा क्या है?
आंवले को मिश्री या खांड की चाशनी में पकाकर बनाया गया पारंपरिक आयुर्वेदिक व्यंजन ही आंवले का मुरब्बा कहलाता है। इसमें आंवले के पोषक तत्व लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं। पकाने की प्रक्रिया के दौरान आंवला नरम हो जाता है और आसानी से पचने लगता है। यही कारण है कि इसे बच्चे से लेकर बुज़ुर्ग तक आराम से खा सकते हैं।
आंवला प्राकृतिक रूप से खट्टा होता है, लेकिन मुरब्बा बनने के बाद उसका स्वाद संतुलित हो जाता है, जिससे यह स्वाद और सेहत दोनों का मेल बन जाता है।
आंवले का मुरब्बा क्यों खास माना जाता है?
आंवला विटामिन C का प्राकृतिक स्रोत है, जो गर्म करने या पकाने के बाद भी काफी हद तक सुरक्षित रहता है। मुरब्बे के रूप में आंवला शरीर में धीरे-धीरे असर दिखाता है और लंबे समय तक ताकत देता है। यही वजह है कि इसे देसी टॉनिक भी कहा जाता है।
आयुर्वेद के अनुसार आंवला त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) को संतुलित करने में मदद करता है। नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है और उम्र के साथ आने वाली कई समस्याओं से बचाव होता है।
आंवले का मुरब्बा खाने के फायदे
1. इम्युनिटी मजबूत करता है
आंवले में मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं। नियमित रूप से आंवले का मुरब्बा खाने से बार-बार होने वाली सर्दी, खांसी और वायरल संक्रमण से बचाव में मदद मिलती है।
2. पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है
जिन लोगों को गैस, अपच, कब्ज या पेट भारी रहने की समस्या रहती है, उनके लिए आंवले का मुरब्बा लाभकारी माना जाता है। यह पाचन रसों को सक्रिय करता है और आंतों की सफाई में मदद करता है।
3. आंखों की रोशनी के लिए फायदेमंद
आंवला आंखों की सेहत के लिए जाना जाता है। इसके नियमित सेवन से आंखों में जलन, थकान और कमजोर रोशनी की समस्या में सुधार देखा जा सकता है।
4. बालों की सेहत सुधारता है
बालों का झड़ना, समय से पहले सफेदी या रूखापन – इन समस्याओं में आंवले का मुरब्बा सहायक माना जाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व बालों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं।
5. कमजोरी और थकान में लाभकारी
जो लोग जल्दी थक जाते हैं या जिनके शरीर में ताकत की कमी महसूस होती है, उनके लिए आंवले का मुरब्बा एक नेचुरल एनर्जी बूस्टर की तरह काम करता है।
6. त्वचा को अंदर से निखारता है
आंवले के एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। इससे त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है और रूखापन कम होता है।
आंवले का मुरब्बा बनाने की सामग्री
• ताजे बड़े आंवले – 500 ग्राम
• मिश्री या देसी खांड – 500 ग्राम
• इलायची पाउडर – आधा छोटा चम्मच
• केसर – 8 से 10 धागे (वैकल्पिक)
• गुलाब जल – 1 छोटा चम्मच (वैकल्पिक)
आंवले का मुरब्बा बनाने की पूरी विधि
1. आंवले चुनना: हमेशा ताज़े, सख्त और बिना दाग-धब्बे वाले बड़े आंवले ही लें। छोटे या बहुत नरम आंवले मुरब्बे के लिए अच्छे नहीं रहते।
2. धोना और सुखाना: आंवलों को साफ पानी से 2–3 बार धो लें। इसके बाद 2–3 दिन तक छांव में फैलाकर सुखाएं, ताकि उनका अंदरूनी पानी कम हो जाए और मुरब्बा जल्दी खराब न हो।
3. हल्का उबालना: एक बड़े बर्तन में पानी उबालें और उसमें आंवले डाल दें। 5–7 मिनट तक हल्का उबाल दें। ध्यान रखें कि आंवले फटें नहीं, बस नरम हों।
4. ठंडा करना: उबालने के बाद आंवलों को पानी से निकालकर ठंडा होने दें। गर्म अवस्था में फांके न निकालें।
5. फांके अलग करना: आंवले ठंडे हो जाएं तो उनकी फांके सावधानी से अलग करें और बीच का कठोर बीज निकाल दें।
6. चाशनी बनाना: कढ़ाही में मिश्री या देसी खांड डालें और धीमी आंच पर हल्की चाशनी तैयार करें। चाशनी एक तार की भी न हो, बस चीनी घुल जाए इतनी रखें।
7. आंवला डालना: तैयार चाशनी में आंवले की फांके डालें और बहुत धीमी आंच पर पकाएं। तेज आंच पर पकाने से मुरब्बा कड़वा हो सकता है।
8. लगातार चलाना: पकाते समय बीच-बीच में लकड़ी या स्टील के चम्मच से हल्के हाथ से चलाते रहें, ताकि आंवले टूटें नहीं और नीचे चिपकें नहीं।
9. खुशबू और स्वाद: जब आंवले चाशनी में अच्छे से पारदर्शी और नरम दिखने लगें, तब इलायची पाउडर और केसर डालें। इससे स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ते हैं।
10. अंतिम टच: गैस बंद करने के बाद अंत में गुलाब जल मिलाएं। गुलाब जल हमेशा गैस बंद करने के बाद ही डालें।
11. पूरी तरह ठंडा करना: मुरब्बे को कढ़ाही में ही पूरी तरह ठंडा होने दें। गर्म मुरब्बा जार में भरने से नमी आ सकती है।
12. स्टोर करना: ठंडा होने के बाद आंवले का मुरब्बा साफ, सूखे और एयरटाइट कांच के जार में भरकर रखें। हमेशा सूखा चम्मच ही इस्तेमाल करें।
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आंवले का मुरब्बा कैसे और कब खाएं?
आंवले का मुरब्बा खाने का सही समय और तरीका जानना भी जरूरी है।
• सुबह खाली पेट 1 से 2 टुकड़े खाना सबसे बेहतर माना जाता है।
• दूध के साथ सेवन करने से इसके फायदे और बढ़ जाते हैं।
• बुज़ुर्ग रोज़ाना नियमित रूप से इसका सेवन कर सकते हैं।
• बच्चों को आधा टुकड़ा देना पर्याप्त होता है।
नियमित सेवन से इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर दिखने लगता है।
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?
जिन लोगों को शुगर की समस्या है, उन्हें मुरब्बे की मात्रा सीमित रखनी चाहिए या बिना चीनी वाला विकल्प अपनाना चाहिए। किसी भी गंभीर बीमारी या दवा चल रही हो, तो सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. आंवले का मुरब्बा रोज़ खा सकते हैं?
हां, रोज़ 1–2 टुकड़े खाए जा सकते हैं। इससे शरीर को धीरे-धीरे फायदा मिलता है।
Q2. आंवले का मुरब्बा कब खाना सही रहता है?
सुबह खाली पेट खाना बेहतर रहता है। चाहें तो बाद में गुनगुना दूध लिया जा सकता है।
Q3. शुगर वाले लोग आंवले का मुरब्बा खा सकते हैं?
शुगर में मात्रा सीमित रखें। बिना चीनी या कम खांड वाला मुरब्बा बेहतर रहता है।
Q4. बच्चों को आंवले का मुरब्बा दिया जा सकता है?
हां, बच्चों को आधा टुकड़ा काफी होता है।
Q5. आंवले का मुरब्बा कितने समय तक चलता है?
साफ, सूखे कांच के जार में रखा जाए तो 6 महीने से 1 साल तक सुरक्षित रहता है।
Q6. क्या आंवले का मुरब्बा गर्म तासीर का होता है?
नहीं, आंवला ठंडी तासीर का होता है और मुरब्बा भी संतुलन बनाए रखता है।
Q7. ज्यादा खाने से कोई नुकसान?
ज्यादा मात्रा में खाने से भारीपन हो सकता है। तय मात्रा में ही लें।
निष्कर्ष
आंवले का मुरब्बा सिर्फ एक मीठा व्यंजन नहीं, बल्कि सेहत को संभालने वाला पारंपरिक उपाय है। सही तरीके से बनाया और सही मात्रा में खाया जाए, तो यह इम्युनिटी, पाचन, आंखों, बालों और पूरे शरीर के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इस तरह के देसी और भरोसेमंद नुस्खों को अपनाना शरीर के लिए एक अच्छा सहारा बन सकता है।


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