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गुरुवार, 15 जनवरी 2026

Winter Green Peas: सर्दियों में हरि मटर खाना बुजुर्गों के लिए क्यों नुकसानदायक है।

Winter Green Peas: सर्दियों में हरि मटर खाना बुजुर्गों के लिए क्यों नुकसानदायक है।

Winter Green Peas: सर्दियों में हरि मटर खाना बुजुर्गों के लिए क्यों नुकसानदायक है।

अक्सर बुज़ुर्ग यही सोचते हैं कि जो चीज़ हरी है, ताज़ी है और सब खाते हैं, वो नुकसान कैसे कर सकती है। इसी सोच के साथ मटर सर्दियों में लगभग रोज़ थाली में आ जाती है। लेकिन सच्चाई यह है कि कई बार नुकसान धीरे-धीरे होता है, बिना शोर के। न पेट तुरंत दर्द करता है, न शरीर तुरंत चेतावनी देता है। बस रोज़ की आदतें अंदर ही अंदर असर दिखाने लगती हैं। मटर भी ऐसी ही एक सब्ज़ी है, जो देखने में हल्की लगती है, लेकिन कुछ बुज़ुर्गों के शरीर में चुपचाप परेशानियाँ खड़ी कर सकती है। यह लेख डराने के लिए नहीं, बल्कि आँखें खोलने के लिए है — ताकि समय रहते समझ आ सके कि रोज़ खाई जाने वाली मटर शरीर के साथ क्या कर रही है।


मटर का शरीर पर असर – उम्र बढ़ने के बाद क्यों बदल जाता है प्रभाव

मटर में प्रोटीन, फाइबर और नैचुरल शुगर पाई जाती है, जो युवाओं के लिए ऊर्जा का अच्छा स्रोत मानी जाती है। लेकिन बुज़ुर्गों में पाचन तंत्र की गति धीमी हो जाती है। Winter season में आंतें उतनी सक्रिय नहीं रहतीं और पेट की पाचन शक्ति भी कमजोर पड़ जाती है। ऐसे में ठंडी तासीर की मटर पूरी तरह नहीं पच पाती और शरीर में भारीपन पैदा करती है। कई बार यही अधपचा भोजन गैस, कब्ज़ और दर्द जैसी समस्याओं की जड़ बन जाता है। इसलिए उम्र के बाद मटर का असर शरीर पर पहले से अलग दिखाई देने लगता है।


गैस और पेट फूलने की समस्या – सबसे आम लेकिन अनदेखी परेशानी

बुज़ुर्गों में मटर खाने के बाद पेट फूलना और गैस बनना बहुत आम समस्या है। मटर गैस बनाने वाली सब्ज़ियों में गिनी जाती है। जब पाचन कमजोर होता है, तो मटर देर तक पेट में पड़ी रहती है और धीरे-धीरे गैस बनाती है। इसका असर सिर्फ पेट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सीने में भारीपन, बेचैनी और नींद की कमी तक पहुँच सकता है। कई बुज़ुर्ग इसे उम्र का असर मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन लगातार ऐसा होना शरीर के लिए सही संकेत नहीं है।


जोड़ों के दर्द से मटर का संबंध – सर्दियों में क्यों बढ़ जाती है तकलीफ़

बहुत से बुज़ुर्ग यह महसूस करते हैं कि मटर खाने के बाद घुटनों, कमर या उंगलियों में दर्द बढ़ जाता है। मटर शरीर में वात को बढ़ाने का काम कर सकती है। वात बढ़ने से जोड़ों में जकड़न आती है और पुराने अर्थराइटिस के दर्द में तेज़ी आ सकती है। खासकर सर्दियों के मौसम में, जब शरीर पहले से ही अकड़ा हुआ रहता है, तब मटर का यह असर ज़्यादा साफ़ दिखाई देता है।


कब्ज़ की परेशानी – फाइबर होते हुए भी क्यों बढ़ती है समस्या

मटर में मौजूद फाइबर को आमतौर पर कब्ज़ के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन बुज़ुर्गों में यही फाइबर कई बार उल्टा असर करता है। कमजोर पाचन शक्ति के कारण यह फाइबर पूरी तरह पच नहीं पाता। नतीजा यह होता है कि पेट साफ़ नहीं होता, ज़ोर लगाना पड़ता है और शौच की परेशानी बनी रहती है। धीरे-धीरे यह समस्या शरीर को थका देती है और भूख भी कम होने लगती है।

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ब्लड शुगर पर असर – छुपा हुआ लेकिन ज़रूरी सच

मटर को अक्सर शुगर के मरीजों के लिए सुरक्षित मान लिया जाता है, लेकिन इसमें नैचुरल शुगर और कार्बोहाइड्रेट मौजूद होते हैं। बुज़ुर्ग अगर पहले से शुगर की दवाइयाँ ले रहे हों, तो ज़्यादा मटर खाने से ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव आ सकता है। खासतौर पर जब मटर को चावल, रोटी या आलू जैसी चीज़ों के साथ खाया जाता है, तब इसका असर और बढ़ जाता है।


दांतों की कमजोरी और चबाने की समस्या – असर सीधे पेट पर

उम्र बढ़ने के साथ दांत कमजोर हो जाते हैं और ठीक से चबाना मुश्किल हो जाता है। मटर अगर अच्छी तरह चबाई न जाए, तो वह सीधे पेट पर दबाव डालती है। इससे गैस, अपच और भारीपन की समस्या बढ़ जाती है। कई बार लोग पेट को दोष देते हैं, लेकिन असली कारण मुँह से शुरू होता है।


किन बुज़ुर्गों को मटर से ज़्यादा सावधान रहना चाहिए

जिन बुज़ुर्गों को बार-बार गैस बनती है, जोड़ों में दर्द रहता है, कब्ज़ की पुरानी समस्या है या जो शुगर के मरीज़ हैं, उन्हें मटर कम मात्रा में ही खानी चाहिए। कमजोर पाचन वाले बुज़ुर्गों के लिए मटर रोज़ का भोजन नहीं होनी चाहिए।


अगर मटर खानी हो तो सही तरीका – नुकसान से बचने की समझदारी

मटर को पूरी तरह छोड़ने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन सही तरीका अपनाना बहुत ज़रूरी है। मटर हमेशा अच्छी तरह उबालकर खानी चाहिए ताकि वह नरम हो जाए और आसानी से पच सके। उसमें थोड़ा हींग या अदरक डालना पाचन के लिए फायदेमंद रहता है। दिन के समय थोड़ी मात्रा में मटर खाना बेहतर रहता है, जबकि रात के खाने में मटर से बचना समझदारी है। हफ्ते में एक या दो बार से ज़्यादा मटर नहीं खानी चाहिए।


निष्कर्ष 

मटर सेहतमंद सब्ज़ी है, लेकिन हर उम्र और हर शरीर के लिए एक जैसी नहीं होती। बुज़ुर्गों के लिए सबसे ज़रूरी है हल्का, सुपाच्य और शरीर के अनुकूल भोजन चुनना। अगर मटर खाने के बाद शरीर परेशानी के संकेत दे रहा है, तो उसे नज़रअंदाज़ करना समझदारी नहीं है। सही मात्रा और सही तरीके से ही मटर बुज़ुर्गों के लिए सुरक्षित हो सकती है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: क्या बुज़ुर्ग मटर बिल्कुल न खाएँ?

नहीं, मटर को पूरी तरह बंद करने की ज़रूरत नहीं है। अगर पाचन ठीक है और मटर खाने से कोई परेशानी नहीं होती, तो थोड़ी मात्रा में मटर खाई जा सकती है। ज़रूरी यह है कि शरीर की प्रतिक्रिया को समझा जाए।

प्रश्न 2: बुज़ुर्गों के लिए मटर खाने का सबसे सही समय क्या है?

मटर दिन के समय, खासकर दोपहर के भोजन में खाना बेहतर रहता है। रात के खाने में मटर लेने से गैस और भारीपन की समस्या बढ़ सकती है।

प्रश्न 3: क्या उबली मटर ज़्यादा सुरक्षित होती है?

हाँ, अच्छी तरह उबली हुई मटर पचाने में आसान होती है। कच्ची या अधपकी मटर बुज़ुर्गों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है।

प्रश्न 4: शुगर के मरीज़ बुज़ुर्ग मटर खा सकते हैं?

शुगर के मरीज़ बुज़ुर्ग मटर कम मात्रा में खा सकते हैं, लेकिन रोज़ नहीं। साथ में चावल या आलू लेने से बचना चाहिए और शुगर लेवल पर नज़र रखनी चाहिए।

प्रश्न 5: मटर खाने के बाद अगर गैस बने तो क्या करें?

अगर मटर खाने के बाद गैस या भारीपन महसूस हो, तो मात्रा कम कर दें या कुछ समय के लिए मटर से दूरी बना लें। साथ ही मटर बनाते समय हींग या अदरक का उपयोग करने से पाचन बेहतर हो सकता है।

Disclaimer

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी बीमारी, एलर्जी या दवा से संबंधित निर्णय लेने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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